श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 91: श्रीराम के आदेश से अश्वमेध यज्ञ की तैयारी  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  7.91.20-21 
अतोऽनुरूपं स्नेहं च गन्धं संक्षिप्तमेव च॥ २०॥
सुवर्णकोटॺो बहुला हिरण्यस्य शतोत्तरा:।
अग्रतो भरत: कृत्वा गच्छत्वग्रे समाधिना॥ २१॥
 
 
अनुवाद
घी, तेल, दूध, दही, कच्चा चन्दन और कच्चा सुगन्धित द्रव्य भी उसी के अनुसार भेजना चाहिए। भरत को सौ करोड़ से भी अधिक स्वर्ण-रजत मुद्राएँ लेकर बड़ी सावधानी से यात्रा करनी चाहिए।॥ 20-21॥
 
‘Ghee, oil, milk, curd, unmilled sandalwood and unmilled perfumes should also be sent accordingly. Bharata should go ahead with more than a hundred crores of gold and silver coins and travel with great caution.॥ 20-21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)