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श्लोक 18
श्लोक
7.91.18
तुष्ट: पुष्टश्च सर्वोऽसौ मानितश्च यथाविधि।
प्रतियास्यति धर्मज्ञ शीघ्रमामन्त्र्यतां जन:॥ १८॥
अनुवाद
हे ज्ञानी लक्ष्मण! लोगों को शीघ्र आमंत्रित करो और जो भी आये वह विधिपूर्वक संतुष्ट, बलवान और सम्मानित होकर लौट जाए। ॥18॥
O knowledgeable Lakshmana! Invite the people quickly and whoever comes should return satisfied, strengthened and honoured as per the rituals. ॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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