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ramayan 7.91.16-17: हे महाबाहु रघुनन्दन! वहाँ यज्ञ की निर्विघ्न समाप्ति के लिए सर्वत्र शान्ति स्थापित करो। उस परम उत्तम एवं उत्कृष्ट महायज्ञ को देखकर नैमिषारण्य के सैकड़ों धर्मात्मा पुरुष कृतार्थ हों। 16-17॥   |   ramayan सर्ग 7.91: श्रीराम के आदेश से अश्वमेध यज्ञ की तैयारी   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 91: श्रीराम के आदेश से अश्वमेध यज्ञ की तैयारी  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  7.91.16-17 
शान्तयश्च महाबाहो प्रवर्तन्तां समन्तत:॥ १६॥
शतशश्चापि धर्मज्ञा: क्रतुमुख्यमनुत्तमम्।
अनुभूय महायज्ञं नैमिषे रघुनन्दन॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे महाबाहु रघुनन्दन! वहाँ यज्ञ की निर्विघ्न समाप्ति के लिए सर्वत्र शान्ति स्थापित करो। उस परम उत्तम एवं उत्कृष्ट महायज्ञ को देखकर नैमिषारण्य के सैकड़ों धर्मात्मा पुरुष कृतार्थ हों। 16-17॥
 
Mighty-armed Raghunandan! For the smooth completion of the Yagya there, start peace everywhere. May hundreds of religious men in Naimisharanya be gratified after seeing that most excellent and excellent Mahayagya. 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)