श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 91: श्रीराम के आदेश से अश्वमेध यज्ञ की तैयारी  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.91.1 
एतदाख्याय काकुत्स्थो भ्रातृभ्याममितप्रभ:।
लक्ष्मणं पुनरेवाह धर्मयुक्तमिदं वच:॥ १॥
 
 
अनुवाद
यह कथा दोनों भाइयों को सुनाकर महाप्रतापी श्री रामजी ने पुनः लक्ष्मण से यह धर्ममयी बात कही -॥1॥
 
After narrating this tale to both his brothers, the illustrious Sri Rama once again spoke the following righteous thing to Lakshmana -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)