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ramayan 7.90.15-16h: तत्पश्चात् वह महान् यज्ञ बुद्ध के आश्रम के निकट सम्पन्न हुआ और परम तेजस्वी रुद्रदेव को उससे महान् संतोष प्राप्त हुआ॥15 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.90: अश्वमेध के अनुष्ठान से इला को पुरुषत्व की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 90: अश्वमेध के अनुष्ठान से इला को पुरुषत्व की प्राप्ति  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  7.90.15-16h 
ततो यज्ञो महानासीद् बुधाश्रमसमीपत:॥ १५॥
रुद्रश्च परमं तोषमाजगाम महायशा:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह महान् यज्ञ बुद्ध के आश्रम के निकट सम्पन्न हुआ और परम तेजस्वी रुद्रदेव को उससे महान् संतोष प्राप्त हुआ॥15 1/2॥
 
‘Then that great sacrifice was performed near the hermitage of Buddha and the highly illustrious Rudradeva derived great satisfaction from it.॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)