श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 88: इला और बुध का एक-दूसरे को देखना तथा बुध का उन सब स्त्रियोंको किंपुरुषी नाम देकर पर्वत पर रहने के लिये आदेश देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.88.4 
तयोस्तद् भाषितं श्रुत्वा कौतूहलसमन्वितम्।
कथयामास काकुत्स्थस्तस्य राज्ञो यथागतम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण और भरत के कौतुहलपूर्ण वचन सुनकर श्रीराम ने राजा इल की कथा पुनः उसी रूप में सुनानी आरम्भ की, जैसी वह उपलब्ध थी।
 
On hearing the curious words of Lakshmana and Bharata, Sri Rama began to narrate the story of King Ila again, in the same form as it was available.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)