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ramayan 7.87.25-27h: देवी पार्वती का वह परम उत्तम एवं अद्भुत वरदान सुनकर राजा अत्यन्त प्रसन्न हुए और उन्होंने इस प्रकार कहा - 'देवी! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मैं एक मास तक पृथ्वी पर अप्रतिम सुन्दरी स्त्री के रूप में तथा उसके बाद एक मास तक पुरुष के रूप में निवास करूँगा।'   |   ramayan सर्ग 7.87: श्रीराम का लक्ष्मण को राजा इल की कथा सुनाना – इल को एक-एक मासतक स्त्रीत्व और पुरुषत्व की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 87: श्रीराम का लक्ष्मण को राजा इल की कथा सुनाना – इल को एक-एक मासतक स्त्रीत्व और पुरुषत्व की प्राप्ति  »  श्लोक 25-27h
 
 
श्लोक  7.87.25-27h 
तदद्भुततरं श्रुत्वा देव्या वरमनुत्तमम्॥ २५॥
सम्प्रहृष्टमना भूत्वा राजा वाक्यमथाब्रवीत्।
यदि देवि प्रसन्ना मे रूपेणाप्रतिमा भुवि॥ २६॥
मासं स्त्रीत्वमुपासित्वा मासं स्यां पुरुष: पुन:।
 
 
अनुवाद
देवी पार्वती का वह परम उत्तम एवं अद्भुत वरदान सुनकर राजा अत्यन्त प्रसन्न हुए और उन्होंने इस प्रकार कहा - 'देवी! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मैं एक मास तक पृथ्वी पर अप्रतिम सुन्दरी स्त्री के रूप में तथा उसके बाद एक मास तक पुरुष के रूप में निवास करूँगा।'
 
On hearing that most excellent and most wonderful boon from Goddess Parvati, the king felt very pleased and he said thus - 'Goddess! If you are pleased with me, then I will live on earth as a matchless beautiful woman for one month and then live as a man for one month.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)