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ramayan 7.87.2: हे श्रेष्ठ लक्ष्मण! वृत्रासुर का सम्पूर्ण प्रसंग तथा अश्वमेध यज्ञ का फल जैसा आपने बताया है, वह उसी रूप में सत्य है। 2॥   |   ramayan सर्ग 7.87: श्रीराम का लक्ष्मण को राजा इल की कथा सुनाना – इल को एक-एक मासतक स्त्रीत्व और पुरुषत्व की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 87: श्रीराम का लक्ष्मण को राजा इल की कथा सुनाना – इल को एक-एक मासतक स्त्रीत्व और पुरुषत्व की प्राप्ति  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.87.2 
एवमेव नरश्रेष्ठ यथा वदसि लक्ष्मण।
वृत्रघातमशेषेण वाजिमेधफलं च यत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ लक्ष्मण! वृत्रासुर का सम्पूर्ण प्रसंग तथा अश्वमेध यज्ञ का फल जैसा आपने बताया है, वह उसी रूप में सत्य है। 2॥
 
The greatest Lakshman! The entire incident of Vritrasura and the results of Ashwamedha Yagya as described by you are correct in that form only. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)