श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 87: श्रीराम का लक्ष्मण को राजा इल की कथा सुनाना – इल को एक-एक मासतक स्त्रीत्व और पुरुषत्व की प्राप्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.87.1 
तच्छ्रुत्वा लक्ष्मणेनोक्तं वाक्यं वाक्यविशारद:।
प्रत्युवाच महातेजा: प्रहसन् राघवो वच:॥ १॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण के ये वचन सुनकर वार्तालाप कला में निपुण श्री रघुनाथजी ने मुस्कुराते हुए कहा-॥1॥
 
On hearing these words of Lakshmana, the mighty Sri Raghunatha, adept in the art of conversation, smilingly said -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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