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ramayan 7.86.2: देवताओं को आतंकित करने वाले महाबली वृत्रासुर के वध के पश्चात् ब्राह्मण हत्या के पाप से घिरे हुए इन्द्र को बहुत समय तक होश नहीं आया। 2.   |   ramayan सर्ग 7.86: इन्द्र के बिना जगत् में अशान्ति तथा अश्वमेध के अनुष्ठान से इन्द्र का ब्रह्महत्या से मुक्त होना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.86.2 
ततो हते महावीर्ये वृत्रे देवभयंकरे।
ब्रह्महत्यावृत: शक्र: संज्ञां लेभे न वृत्रहा॥ २॥
 
 
अनुवाद
देवताओं को आतंकित करने वाले महाबली वृत्रासुर के वध के पश्चात् ब्राह्मण हत्या के पाप से घिरे हुए इन्द्र को बहुत समय तक होश नहीं आया। 2.
 
After the slaying of the mighty Vritrasura, who terrorised the gods, Indra, who was surrounded by the sins of killing a brahmin, did not regain consciousness for a long time. 2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)