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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 84: लक्ष्मण का अश्वमेध यज्ञ का प्रस्ताव करते हुए इन्द्र और वृत्रासुर की कथा सुनाना, वृत्रासुर की तपस्या और इन्द्र का भगवान् विष्णु से उसके वध के लिये अनुरोध  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.84.4 
पुरा किल महाबाहो देवासुरसमागमे।
वृत्रो नाम महानासीद् दैतेयो लोकसम्मत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! बहुत समय पहले की बात है, जब देवता और दानव एक साथ रहते थे, उन दिनों वृत्रन नाम का एक महान दानव रहता था। संसार में उसका बड़ा सम्मान था।
 
‘Mahabaho! It is a matter of time ago, when the gods and demons lived together, in those days there lived a great demon known as Vritran. He was greatly respected in the world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)