श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 84: लक्ष्मण का अश्वमेध यज्ञ का प्रस्ताव करते हुए इन्द्र और वृत्रासुर की कथा सुनाना, वृत्रासुर की तपस्या और इन्द्र का भगवान् विष्णु से उसके वध के लिये अनुरोध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.84.15 
यदा हि प्रीतिसंयोगं त्वया विष्णो समागत:।
तदाप्रभृति लोकानां नाथत्वमुपलब्धवान्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
"विष्णु! जब से वह आप पर मोहित हुआ है, तब से उसने सम्पूर्ण लोकों पर अधिकार कर लिया है ॥15॥
 
"Vishnu! Ever since he has fallen in love with you, he has acquired control over all the worlds. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)