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ramayan 7.84.11: जब वृत्रासुर तप करने लगा, तब इन्द्र अत्यन्त दुःखी हुए और भगवान विष्णु के पास जाकर इस प्रकार बोले:॥11॥   |   ramayan सर्ग 7.84: लक्ष्मण का अश्वमेध यज्ञ का प्रस्ताव करते हुए इन्द्र और वृत्रासुर की कथा सुनाना, वृत्रासुर की तपस्या और इन्द्र का भगवान् विष्णु से उसके वध के लिये अनुरोध   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 84: लक्ष्मण का अश्वमेध यज्ञ का प्रस्ताव करते हुए इन्द्र और वृत्रासुर की कथा सुनाना, वृत्रासुर की तपस्या और इन्द्र का भगवान् विष्णु से उसके वध के लिये अनुरोध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.84.11 
तपस्तप्यति वृत्रे तु वासव: परमार्तवत्।
विष्णुं समुपसंक्रम्य वाक्यमेतदुवाच ह॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब वृत्रासुर तप करने लगा, तब इन्द्र अत्यन्त दुःखी हुए और भगवान विष्णु के पास जाकर इस प्रकार बोले:॥11॥
 
When Vritraasura started meditating, Indra became very sad and went to Lord Vishnu and said thus:॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)