श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 83: भरत के कहने से श्रीराम का राजसूय यज्ञ करने के विचार से निवृत्त होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.83.9 
श्रुत्वा तु राघवस्यैतद् वाक्यं वाक्यविशारद:।
भरत: प्राञ्जलिर्भूत्वा वाक्यमेतदुवाच ह॥ ९॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी के ये वचन सुनकर वाक्यविशारद भरत ने हाथ जोड़कर यह कहा-॥9॥
 
On hearing these words of Shri Raghunathji, Vakyavisharda Bharata folded his hands and said this -॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)