vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 83: भरत के कहने से श्रीराम का राजसूय यज्ञ करने के विचार से निवृत्त होना
»
श्लोक 9
श्लोक
7.83.9
श्रुत्वा तु राघवस्यैतद् वाक्यं वाक्यविशारद:।
भरत: प्राञ्जलिर्भूत्वा वाक्यमेतदुवाच ह॥ ९॥
अनुवाद
श्री रघुनाथजी के ये वचन सुनकर वाक्यविशारद भरत ने हाथ जोड़कर यह कहा-॥9॥
On hearing these words of Shri Raghunathji, Vakyavisharda Bharata folded his hands and said this -॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×