श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 83: भरत के कहने से श्रीराम का राजसूय यज्ञ करने के विचार से निवृत्त होना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.83.2 
दृष्ट्वा तु राघव: प्राप्तावुभौ भरतलक्ष्मणौ।
परिष्वज्य ततो रामो वाक्यमेतदुवाच ह॥ २॥
 
 
अनुवाद
भरत और लक्ष्मण को आते देख रघुकुलतिलक श्री राम ने उन्हें गले लगा लिया और इस प्रकार कहा -
 
Seeing Bharat and Lakshman coming, Shri Ram, the Raghukultilak, embraced them and said this -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)