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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 83: भरत के कहने से श्रीराम का राजसूय यज्ञ करने के विचार से निवृत्त होना
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श्लोक 18
श्लोक
7.83.18
इदं वचनमक्लीबं त्वया धर्मसमागतम्।
व्याहृतं पुरुषव्याघ्र पृथिव्या: परिपालनम्॥ १८॥
अनुवाद
हे नरसिंह! तुम्हारे मुख से निकला यह उदार एवं धर्ममय वचन सम्पूर्ण पृथ्वी की रक्षा करेगा।
O lion of men! This generous and righteous statement coming from your mouth will protect the entire earth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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