श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 83: भरत के कहने से श्रीराम का राजसूय यज्ञ करने के विचार से निवृत्त होना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.83.15 
सर्वं पुरुषशार्दूल गुणैरतुलविक्रम।
पृथिवीं नार्हसे हन्तुं वशे हि तव वर्तते॥ १५॥
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह! आप अपार पराक्रमी वीर योद्धा हैं! आपके सद्गुणों के कारण सारा जगत आपके अधीन है। इस पृथ्वी के निवासियों का विनाश करना आपके लिए उचित नहीं होगा।॥15॥
 
Purushasingh! You are a brave warrior of immense power! Due to your good qualities the whole world is under your control. It will not be right for you to destroy the inhabitants of this earth.'॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)