श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 83: भरत के कहने से श्रीराम का राजसूय यज्ञ करने के विचार से निवृत्त होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.83.14 
पृथिव्यां ये च पुरुषा राजन् पौरुषमागता:।
सर्वेषां भविता तत्र संक्षय: सर्वकोपज:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजा! पृथ्वी पर जितने भी परिश्रमी मनुष्य हैं, वे सब उस यज्ञ में सबके क्रोध के कारण नष्ट हो जायेंगे॥14॥
 
King! All the hard-working men on earth will be destroyed in that Yagya due to everyone's anger. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)