श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 83: भरत के कहने से श्रीराम का राजसूय यज्ञ करने के विचार से निवृत्त होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.83.1 
तच्छ्रुत्वा भाषितं तस्य रामस्याक्लिष्टकर्मण:।
द्वा:स्थ: कुमारावाहूय राघवाय न्यवेदयत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
बिना किसी दुःख के कर्म करने वाले श्री रामजी के ये वचन सुनकर द्वारपाल ने राजकुमार भरत और लक्ष्मण को बुलाकर श्री रघुनाथजी की सेवा में प्रस्तुत किया॥1॥
 
On hearing these words of Sri Rama, who performs actions without any pain, the gatekeeper summoned Prince Bharat and Lakshman and presented them in the service of Sri Raghunathji.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)