श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 82: श्रीराम का अगस्त्य-आश्रम से अयोध्यापुरी को लौटना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.82.3 
तस्यागस्त्यो बहुगुणं कन्दमूलं तथौषधम्।
शाल्यादीनि पवित्राणि भोजनार्थमकल्पयत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
अगस्त्यजी ने उन्हें कंद, मूल, वृद्धावस्था दूर करने वाली दिव्य औषधियाँ, शुद्ध चावल आदि भोजन के लिए दिए॥3॥
 
Agastya offered him tubers, roots, divine medicines for removing old age, pure rice etc. for food. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)