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ramayan 7.81.6: चूँकि उस दुष्ट ने ऐसा घोर पाप किया है, अतः उसे अपने पापकर्म का फल अवश्य भोगना पड़ेगा ॥6॥   |   ramayan सर्ग 7.81: शुक्र के शाप से सपरिवार राजा दण्ड और उनके राज्य का नाश   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 81: शुक्र के शाप से सपरिवार राजा दण्ड और उनके राज्य का नाश  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.81.6 
यस्मात् स कृतवान् पापमीदृशं घोरसंहितम्।
तस्मात् प्राप्स्यति दुर्मेधा: फलं पापस्य कर्मण:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
चूँकि उस दुष्ट ने ऐसा घोर पाप किया है, अतः उसे अपने पापकर्म का फल अवश्य भोगना पड़ेगा ॥6॥
 
Since that wicked person has committed such a grave sin, he will certainly have to bear the consequences of his sinful act. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)