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मा मां स्पृश बलाद् राजन् कन्या पितृवशा ह्यहम्।
गुरु: पिता मे राजेन्द्र त्वं च शिष्यो महात्मन:॥ ९॥
अनुवाद
"हे राजन! मुझे बलपूर्वक स्पर्श न करें। मैं अपने पिता के अधीन एक कुंवारी कन्या हूँ। राजेन्द्र! मेरे पिता आपके गुरु हैं और आप उस महात्मा के शिष्य हैं।"
"O King! Do not touch me forcefully. I am a virgin daughter under the control of my father. Rajendra! My father is your Guru and you are the disciple of that great soul.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥