श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 79: इक्ष्वाकुपुत्र राजा दण्डका राज्य  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.79.3 
तद् वनं स कथं राजा शून्यं मनुजवर्जितम्।
तपश्चर्तुं प्रविष्ट: स श्रोतुमिच्छामि तत्त्वत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
विदर्भराज उस निर्जन वन में तपस्या करने क्यों गए थे? मैं सत्य बात सुनना चाहता हूँ।॥3॥
 
Why did the King of Vidarbha go to that lonely forest to do penance? I want to hear the truth.'॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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