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ramayan 7.79.2: हे प्रभु! वह भयानक वन, जहाँ विदर्भ के राजा श्वेत घोर तपस्या करते थे, पशु-पक्षियों से रहित क्यों हो गया?॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 7.79: इक्ष्वाकुपुत्र राजा दण्डका राज्य   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 79: इक्ष्वाकुपुत्र राजा दण्डका राज्य  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.79.2 
भगवंस्तद् वनं घोरं तपस्तप्यति यत्र स:।
श्वेतो वैदर्भको राजा कथं तदमृगद्विजम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! वह भयानक वन, जहाँ विदर्भ के राजा श्वेत घोर तपस्या करते थे, पशु-पक्षियों से रहित क्यों हो गया?॥ 2॥
 
O Lord! Why had that dreadful forest, where King Shwet of Vidarbha used to perform severe penance, become devoid of animals and birds?॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)