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ramayan 7.78.9: अपने भाई राजा सुरथ को राजा के रूप में अभिषिक्त करने के बाद, मैं इस झील के पास आया और लंबे समय तक तपस्या की।   |   ramayan सर्ग 7.78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.78.9 
भ्रातरं सुरथं राज्ये अभिषिच्य महीपतिम्।
इदं सर: समासाद्य तपस्तप्तं मया चिरम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अपने भाई राजा सुरथ को राजा के रूप में अभिषिक्त करने के बाद, मैं इस झील के पास आया और लंबे समय तक तपस्या की।
 
After anointing my brother King Surath as the king, I came near this lake and performed penance for a long time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)