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ramayan 7.78.3: 'पूर्वकाल में मेरे यशस्वी पिता विदर्भ के राजा थे। उनका नाम सुदेव था। वे तीनों लोकों में अपने पराक्रम के लिए विख्यात थे।   |   ramayan सर्ग 7.78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.78.3 
पुरा वैदर्भको राजा पिता मम महायशा:।
सुदेव इति विख्यातस्त्रिषु लोकेषु वीर्यवान्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'पूर्वकाल में मेरे यशस्वी पिता विदर्भ के राजा थे। उनका नाम सुदेव था। वे तीनों लोकों में अपने पराक्रम के लिए विख्यात थे।
 
‘In the past, my illustrious father was the king of Vidarbha. His name was Sudeva. He was renowned for his mighty power in all the three worlds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)