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ramayan 7.78.24: ब्रह्मन्! ब्रह्मर्षे! यह दिव्य आभूषण स्वर्ण, धन, वस्त्र, अन्न तथा नाना प्रकार के आभूषण भी देता है। 24॥   |   ramayan सर्ग 7.78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.78.24 
इदं तावत् सुवर्णं च धनं वस्त्राणि च द्विज।
भक्ष्यं भोज्यं च ब्रह्मर्षे ददात्याभरणानि च॥ २४॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! ब्रह्मर्षे! यह दिव्य आभूषण स्वर्ण, धन, वस्त्र, अन्न तथा नाना प्रकार के आभूषण भी देता है। 24॥
 
Brahman! Brahmarshe! This divine ornament also gives gold, money, clothes, food and various other types of ornaments. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)