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ramayan 7.78.10: इस विशाल वन में तीन हजार वर्षों तक अत्यन्त कठिन तपस्या करके मैंने परम ब्रह्मलोक प्राप्त किया है॥ 10॥   |   ramayan सर्ग 7.78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.78.10 
सोऽहं वर्षसहस्राणि तपस्त्रीणि महावने।
तप्त्वा सुदुष्करं प्राप्तो ब्रह्मलोकमनुत्तमम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इस विशाल वन में तीन हजार वर्षों तक अत्यन्त कठिन तपस्या करके मैंने परम ब्रह्मलोक प्राप्त किया है॥ 10॥
 
After performing extremely arduous penance for three thousand years in this vast forest, I attained the supreme Brahmaloka.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)