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ramayan 7.77.7-8h: हे महात्मन! मैं ज्येष्ठ मास में एक रात उस आश्रम में रुका और प्रातःकाल उठकर स्नान आदि के लिए सरोवर के किनारे जाने लगा।   |   ramayan सर्ग 7.77: महर्षि अगस्त्य का एक स्वर्गीय पुरुष के शवभक्षण का प्रसंग सुनाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 77: महर्षि अगस्त्य का एक स्वर्गीय पुरुष के शवभक्षण का प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  7.77.7-8h 
तत्राहमवसं रात्रिं नैदाघीं पुरुषर्षभ॥ ७॥
प्रभाते कल्यमुत्थाय सरस्तदुपचक्रमे।
 
 
अनुवाद
हे महात्मन! मैं ज्येष्ठ मास में एक रात उस आश्रम में रुका और प्रातःकाल उठकर स्नान आदि के लिए सरोवर के किनारे जाने लगा।
 
O great man! I stayed in that ashram for a night in the month of Jyeshtha and after getting up early in the morning, I started going to the bank of the lake for bathing etc. 7 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)