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तस्य रूपमरण्यस्य निर्देष्टुं न शशाक ह।
फलमूलै: सुखास्वादैर्बहुरूपैश्च पादपै:॥ ३॥
अनुवाद
मैं वर्णन नहीं कर सकता कि उस जंगल का दृश्य कितना मनोरम था। स्वादिष्ट फल, कंद-मूल और नाना प्रकार के रंग-बिरंगे वृक्ष उसकी शोभा बढ़ा रहे थे।
I am unable to describe how pleasant the appearance of that forest was. Delicious fruits and roots and trees of many different colors enhanced its beauty.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥