इत्येवमुक्त: स नरेन्द्र नाकी
कौतूहलात् सूनृतया गिरा च।
श्रुत्वा च वाक्यं मम सर्वमेतत्
सर्वं तथा चाकथयन्ममेति॥ २१॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जब मैंने जिज्ञासावश उस दिव्य पुरुष से मधुर वाणी में यह प्रश्न पूछा, तो उन्होंने मेरी बात सुनकर मुझे यह सब बताया।
O Lord of men! When, out of curiosity, I asked this question to that heavenly being in a sweet voice, he listened to me and told me all this.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे सप्तसप्ततितम: सर्ग: ॥ ७ ७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें सतहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ७ ७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥