Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.77.10-12h: दो घड़ी के बाद मैंने देखा कि एक दिव्य, अद्भुत, अत्यंत उत्तम विमान हंसों से युक्त और मन के समान वेगवान होकर वहाँ उतर रहा है। रघुनन्दन! उस विमान पर एक दिव्य देवता विराजमान थे, जो अत्यंत सुन्दर थे। वीर! उनकी सेवा में हजारों अप्सराएँ बैठी थीं, जो दिव्य आभूषणों से विभूषित थीं। 10-11 1/2। | ramayan सर्ग 7.77: महर्षि अगस्त्य का एक स्वर्गीय पुरुष के शवभक्षण का प्रसंग सुनाना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दो घड़ी के बाद मैंने देखा कि एक दिव्य, अद्भुत, अत्यंत उत्तम विमान हंसों से युक्त और मन के समान वेगवान होकर वहाँ उतर रहा है। रघुनन्दन! उस विमान पर एक दिव्य देवता विराजमान थे, जो अत्यंत सुन्दर थे। वीर! उनकी सेवा में हजारों अप्सराएँ बैठी थीं, जो दिव्य आभूषणों से विभूषित थीं। 10-11 1/2।
After two hours, I saw a divine, wonderful, extremely fine plane landing there with swans and as fast as the mind. Raghunandan! A heavenly deity was sitting on that plane, who was extremely handsome. Brave! Thousands of Apsaras were sitting there in his service, who were adorned with divine ornaments. 10-11 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥