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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम के द्वारा शम्बूक का वध, देवताओं द्वारा उनकी प्रशंसा, अगस्त्याश्रम पर महर्षि अगस्त्य के द्वारा उनका सत्कार और उनके लिये आभूषण-दान  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.76.4 
भाषतस्तस्य शूद्रस्य खड्गं सुरुचिरप्रभम्।
निष्कृष्य कोशाद् विमलं शिरश्चिच्छेद राघव:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जब वह ऐसा कह रहा था, भगवान राम ने म्यान से चमकती हुई तलवार निकाली और उसी से उसका सिर काट दिया।
 
While he was saying this, Lord Rama drew out the gleaming sword from its sheath and cut off his head with the same.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)