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न मिथ्याहं वदे राम देवलोकजिगीषया।
शूद्रं मां विद्धि काकुत्स्थ शम्बूकं नाम नामत:॥ ३॥
अनुवाद
ककुटस्थकुल के रत्न श्री राम! मैं झूठ नहीं बोल रहा। मैं स्वर्ग विजय की इच्छा से तपस्या में लगा हुआ हूँ। कृपया मुझे शूद्र ही मानें। मेरा नाम शम्बूक है।'
Shri Ram, the jewel of the Kakutsthakul! I do not lie. I am engaged in penance with the desire to conquer the heaven. Please consider me a Shudra. My name is Shambuk.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥