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ramayan 7.75.9: उन्होंने अपना धनुष, बाणों से भरे दो तरकश और एक चमचमाती तलवार ली और अपने दोनों भाइयों, लक्ष्मण और भरत को नगर की रक्षा का दायित्व सौंपा और फिर वहां से चले गए।   |   ramayan सर्ग 7.75: श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अपने राज्य की सभी दिशाओं में घूमकर दुष्कर्म का पता लगाना; किंतु सर्वत्र सत्कर्म ही देखकर दक्षिण दिशा में एक शूद्र तपस्वी के पास पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 75: श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अपने राज्य की सभी दिशाओं में घूमकर दुष्कर्म का पता लगाना; किंतु सर्वत्र सत्कर्म ही देखकर दक्षिण दिशा में एक शूद्र तपस्वी के पास पहुँचना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.75.9 
धनुर्गृहीत्वा तूणी च खड्गं च रुचिरप्रभम्।
निक्षिप्य नगरे चैतौ सौमित्रिभरतावुभौ॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपना धनुष, बाणों से भरे दो तरकश और एक चमचमाती तलवार ली और अपने दोनों भाइयों, लक्ष्मण और भरत को नगर की रक्षा का दायित्व सौंपा और फिर वहां से चले गए।
 
He took his bow, two quivers full of arrows and a gleaming sword and assigned his two brothers, Lakshmana and Bharata, to guard the city and then departed from there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)