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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 75: श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अपने राज्य की सभी दिशाओं में घूमकर दुष्कर्म का पता लगाना; किंतु सर्वत्र सत्कर्म ही देखकर दक्षिण दिशा में एक शूद्र तपस्वी के पास पहुँचना
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श्लोक 6
श्लोक
7.75.6
इङ्गितं स तु विज्ञाय पुष्पको हेमभूषित:।
आजगाम मुहूर्तेन समीपे राघवस्य वै॥ ६॥
अनुवाद
श्री रामजी का अभिप्राय समझकर सुवर्ण से अलंकृत पुष्पक विमान उसी क्षण उनके पास आ पहुँचा॥6॥
Understanding Sri Rama's intention, the golden-decorated Pushpaka aircraft arrived at him in the same moment. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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