Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.75.5: शुभलक्षण लक्ष्मण को ऐसा सन्देश दें, महामुनि श्री रघुनाथजी ने मन में पुष्पक्का का विचार करके कहा - 'आओ' ॥5॥   |   ramayan सर्ग 7.75: श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अपने राज्य की सभी दिशाओं में घूमकर दुष्कर्म का पता लगाना; किंतु सर्वत्र सत्कर्म ही देखकर दक्षिण दिशा में एक शूद्र तपस्वी के पास पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 75: श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अपने राज्य की सभी दिशाओं में घूमकर दुष्कर्म का पता लगाना; किंतु सर्वत्र सत्कर्म ही देखकर दक्षिण दिशा में एक शूद्र तपस्वी के पास पहुँचना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.75.5 
एवं संदिश्य काकुत्स्थो लक्ष्मणं शुभलक्षणम्।
मनसा पुष्पकं दध्यावागच्छेति महायशा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
शुभलक्षण लक्ष्मण को ऐसा सन्देश दें, महामुनि श्री रघुनाथजी ने मन में पुष्पक्का का विचार करके कहा - 'आओ' ॥5॥
 
Shubhalakshan should give such a message to Lakshman, the great sage Shri Raghunathji thought about Pushpakka in his mind and said - 'Come'. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)