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ramayan 7.75.11: जब उन दोनों दिशाओं में लेशमात्र भी दुष्कर्म दिखाई नहीं दिया, तब भगवान राम ने सम्पूर्ण पूर्व दिशा का भी निरीक्षण किया॥11॥   |   ramayan सर्ग 7.75: श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अपने राज्य की सभी दिशाओं में घूमकर दुष्कर्म का पता लगाना; किंतु सर्वत्र सत्कर्म ही देखकर दक्षिण दिशा में एक शूद्र तपस्वी के पास पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 75: श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अपने राज्य की सभी दिशाओं में घूमकर दुष्कर्म का पता लगाना; किंतु सर्वत्र सत्कर्म ही देखकर दक्षिण दिशा में एक शूद्र तपस्वी के पास पहुँचना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.75.11 
अपश्यमानस्तत्रापि स्वल्पमप्यथ दुष्कृतम्।
पूर्वामपि दिशं सर्वामथापश्यन्नराधिप:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब उन दोनों दिशाओं में लेशमात्र भी दुष्कर्म दिखाई नहीं दिया, तब भगवान राम ने सम्पूर्ण पूर्व दिशा का भी निरीक्षण किया॥11॥
 
When not even the slightest misdeed was visible in those two directions, then Lord Rama inspected the entire eastern direction as well. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)