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ramayan 7.73.3: वह प्रेम और शोक से विह्वल होकर रो रहा था और बहुत सी बातें कह रहा था। वह बार-बार "बेटा! बेटा!" पुकार रहा था और इस प्रकार विलाप कर रहा था -॥3॥   |   ramayan सर्ग 7.73: एक ब्राह्मण का अपने मरे हुए बालक को राजद्वार पर लाना तथा राजा को ही दोषी बताकर विलाप करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 73: एक ब्राह्मण का अपने मरे हुए बालक को राजद्वार पर लाना तथा राजा को ही दोषी बताकर विलाप करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.73.3 
रुदन् बहुविधा वाच: स्नेहदु:खसमन्वित:।
असकृत् पुत्रपुत्रेति वाक्यमेतदुवाच ह॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वह प्रेम और शोक से विह्वल होकर रो रहा था और बहुत सी बातें कह रहा था। वह बार-बार "बेटा! बेटा!" पुकार रहा था और इस प्रकार विलाप कर रहा था -॥3॥
 
Overwhelmed with love and grief, he was crying and saying many things. He was repeatedly calling out, "Son! Son!" and lamenting in this manner -॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)