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ramayan 7.71.3: महारघुकुलनन्दन शत्रुघ्न यात्रा करते हुए मार्ग में सात-आठ स्थानों पर रुकते हुए वाल्मीकि मुनि के आश्रम में पहुँचे और रात्रि में वहीं ठहरे॥3॥   |   ramayan सर्ग 7.71: शत्रुघ्न का थोड़े-से सैनिकों के साथ अयोध्या को प्रस्थान, मार्ग में वाल्मीकि के आश्रम में रामचरित का गान सुनकर उन सबका आश्चर्यचकित होना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 71: शत्रुघ्न का थोड़े-से सैनिकों के साथ अयोध्या को प्रस्थान, मार्ग में वाल्मीकि के आश्रम में रामचरित का गान सुनकर उन सबका आश्चर्यचकित होना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.71.3 
स गत्वा गणितान् वासान् सप्ताष्टौ रघुनन्दन:।
वाल्मीकाश्रममागत्य वासं चक्रे महायशा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
महारघुकुलनन्दन शत्रुघ्न यात्रा करते हुए मार्ग में सात-आठ स्थानों पर रुकते हुए वाल्मीकि मुनि के आश्रम में पहुँचे और रात्रि में वहीं ठहरे॥3॥
 
After traveling the great Raghukulnandan Shatrughna, stopping at seven-eight enumerated places on the way, he reached the ashram of Valmiki Muni and stayed there at night. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)