श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 71: शत्रुघ्न का थोड़े-से सैनिकों के साथ अयोध्या को प्रस्थान, मार्ग में वाल्मीकि के आश्रम में रामचरित का गान सुनकर उन सबका आश्चर्यचकित होना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.71.24 
न तु कौतूहलाद् युक्तमन्वेष्टुं तं महामुनिम्।
एवं तद् वाक्यमुक्त्वा तु सैनिकान् रघुनन्दन:।
अभिवाद्य महर्षिं तं स्वं निवेशं ययौ तदा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
महामुनि वाल्मीकि से कौतूहलवश इन विषयों को पूछना या जानना उचित नहीं होगा।’ अपने सैनिकों से ऐसा कहकर रघुकुलनन्दन शत्रुघ्न ने मुनि को प्रणाम किया और अपने शिविर में चले गए॥ 24॥
 
It would not be proper to ask or know about these matters from the great sage Valmiki out of curiosity.' Having said this to his soldiers, Raghukul Nandan Shatrughna bowed to the sage and went to his camp.॥ 24॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे एकसप्ततितम: सर्ग: ॥ ७ १॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें इकहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ७ १॥
 
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