श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 71: शत्रुघ्न का थोड़े-से सैनिकों के साथ अयोध्या को प्रस्थान, मार्ग में वाल्मीकि के आश्रम में रामचरित का गान सुनकर उन सबका आश्चर्यचकित होना  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  7.71.22-23 
साधु पृच्छ नरश्रेष्ठ वाल्मीकिं मुनिपुङ्गवम्।
शत्रुघ्नस्त्वब्रवीत् सर्वान् कौतूहलसमन्वितान्॥ २२॥
सैनिका न क्षमोऽस्माकं परिप्रष्टुमिहेदृश:।
आश्चर्याणि बहूनीह भवन्त्यस्याश्रमे मुने:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! आपको इस विषय में महर्षि वाल्मीकि से भली-भाँति पूछना चाहिए।' शत्रुघ्न ने जिज्ञासावश उन सभी सैनिकों से कहा - 'इस आश्रम में ऐसी अनेक आश्चर्यजनक घटनाएँ घटती रहती हैं। उनके विषय में उनसे कुछ पूछना उचित नहीं है।'
 
O best of men! You should ask sage Valmiki about this matter thoroughly.' Shatrughna told all those soldiers, full of curiosity, - 'Many such astonishing events keep happening in this hermitage. It is not appropriate for us to ask him anything about them.
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