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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 71: शत्रुघ्न का थोड़े-से सैनिकों के साथ अयोध्या को प्रस्थान, मार्ग में वाल्मीकि के आश्रम में रामचरित का गान सुनकर उन सबका आश्चर्यचकित होना
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श्लोक 21
श्लोक
7.71.21
शृणुम: किमिदं स्वप्ने गीतबन्धनमुत्तमम्।
विस्मयं ते परं गत्वा शत्रुघ्नमिदमब्रुवन्॥ २१॥
अनुवाद
क्या हम स्वप्न में यह अद्भुत काव्य सुन रहे हैं?’ तब वे अत्यन्त विस्मित होकर शत्रुघ्न से बोले-॥21॥
Are we listening to this wonderful poem in our dreams?' Then, in utter astonishment they said to Shatrughna -॥ 21॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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