श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 71: शत्रुघ्न का थोड़े-से सैनिकों के साथ अयोध्या को प्रस्थान, मार्ग में वाल्मीकि के आश्रम में रामचरित का गान सुनकर उन सबका आश्चर्यचकित होना  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  7.71.19-20 
परस्परं च ये तत्र सैनिका: सम्बभाषिरे॥ १९॥
किमिदं क्व च वर्ताम: किमेतत् स्वप्नदर्शनम्।
अर्थो यो न: पुरा दृष्टस्तमाश्रमपदे पुन:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ उपस्थित शत्रुघ्न के सैनिक आपस में बातें करने लगे - 'यह क्या है ? हम कहाँ हैं ? क्या हम कोई स्वप्न देख रहे हैं ? जो कुछ हमने पहले देखा था, वही सब इस आश्रम में सुन रहे हैं ॥ 19-20॥
 
The soldiers of Shatrughna who were present there started talking to each other-'What is this? Where are we? Are we seeing any dream? Whatever we have seen before, we are hearing the same exact thing in this ashram.॥ 19-20॥
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