श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 71: शत्रुघ्न का थोड़े-से सैनिकों के साथ अयोध्या को प्रस्थान, मार्ग में वाल्मीकि के आश्रम में रामचरित का गान सुनकर उन सबका आश्चर्यचकित होना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  7.71.18-19h 
पदानुगाश्च ये राज्ञस्तां श्रुत्वा गीतिसम्पदम्॥ १८॥
अवाङ्मुखाश्च दीनाश्च ह्याश्चर्यमिति चाब्रुवन्।
 
 
अनुवाद
इस गान-सम्पदा को सुनकर राजा शत्रुघ्न के साथी भी नम्र हो गए और प्रणाम करके बोले - 'यह बड़े आश्चर्य की बात है।' ॥18 1/2॥
 
On hearing this wealth of songs, the companions of King Shatrughna too became humble and bowed down and said, 'This is a matter of great surprise.' ॥18 1/2॥
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