श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 71: शत्रुघ्न का थोड़े-से सैनिकों के साथ अयोध्या को प्रस्थान, मार्ग में वाल्मीकि के आश्रम में रामचरित का गान सुनकर उन सबका आश्चर्यचकित होना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  7.71.17-18h 
स मुहूर्तमिवासंज्ञो विनि:श्वस्य मुहुर्मुहु:॥ १७॥
तस्मिन् गीते यथावृत्तं वर्तमानमिवाशृणोत्।
 
 
अनुवाद
वह दो पल तक बेसुध रहा, बार-बार गहरी साँसें लेता रहा। उस गीत में उसे अतीत की घटनाएँ ऐसे सुनाई दे रही थीं मानो वे वर्तमान हों।
 
He remained unconscious for two moments, taking deep breaths repeatedly. In that song, he heard the past events as if they were the present.
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