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ramayan 7.69.14-15: शत्रुघ्न को भूमि पर गिरा देखकर लवण ने सोचा कि वे मर गए हैं। अतः अवसर पाकर भी राक्षस उनके घर नहीं गया और न ही अपना भाला लाया। उन्हें गिरा हुआ देखकर और उन्हें पूर्णतः मरा हुआ समझकर, वह अपने भोजन का सामान इकट्ठा करने लगा।   |   ramayan सर्ग 7.69: शत्रुघ्न और लवणासुर का युद्ध तथा लवण का वध   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 69: शत्रुघ्न और लवणासुर का युद्ध तथा लवण का वध  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  7.69.14-15 
तमवज्ञाय तु हतं शत्रुघ्नं भुवि पातितम्।
रक्षो लब्धान्तरमपि न विवेश स्वमालयम्॥ १४॥
नापि शूलं प्रजग्राह तं दृष्ट्वा भुवि पातितम्।
ततो हत इति ज्ञात्वा तान् भक्षान् समुदावहत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
शत्रुघ्न को भूमि पर गिरा देखकर लवण ने सोचा कि वे मर गए हैं। अतः अवसर पाकर भी राक्षस उनके घर नहीं गया और न ही अपना भाला लाया। उन्हें गिरा हुआ देखकर और उन्हें पूर्णतः मरा हुआ समझकर, वह अपने भोजन का सामान इकट्ठा करने लगा।
 
Seeing Shatrughna fall on the ground, Lavana thought that he was dead. Therefore, even after getting the opportunity, the demon did not go to his house nor did he bring his spear. Seeing him fallen and thinking that he was completely dead, he started collecting his food items. 14-15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)