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श्लोक 7.68.3  |
एतस्मिन्नन्तरे वीर: शत्रुघ्नो यमुनां नदीम्।
तीर्त्वा मधुपुरद्वारि धनुष्पाणिरतिष्ठत॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| इसी बीच वीर शत्रुघ्न यमुना नदी पार कर हाथ में धनुष लेकर मधुपुरी के द्वार पर खड़े हो गये। |
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| Meanwhile the brave Shatrughna crossed the Yamuna river and stood at the gate of Madhupuri with bow in his hand. |
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