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ramayan 7.68.2: तत्पश्चात्, एक निर्मल प्रातःकाल में भोजन-सामग्री एकत्रित करने की इच्छा से प्रेरित होकर वह वीर राक्षस अपने नगर से चला गया॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 7.68: लवणासुर का आहार के लिये निकलना, शत्रुघ्न का मधुपुरी के द्वार पर डट जाना और लौटे हुए लवणासुर के साथ उनकी रोषभरी बातचीत   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 68: लवणासुर का आहार के लिये निकलना, शत्रुघ्न का मधुपुरी के द्वार पर डट जाना और लौटे हुए लवणासुर के साथ उनकी रोषभरी बातचीत  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.68.2 
तत: प्रभाते विमले तस्मिन् काले स राक्षस:।
निर्गतस्तु पुराद् वीरो भक्ष्याहारप्रचोदित:॥ २॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, एक निर्मल प्रातःकाल में भोजन-सामग्री एकत्रित करने की इच्छा से प्रेरित होकर वह वीर राक्षस अपने नगर से चला गया॥ 2॥
 
Thereafter, on a clear morning, motivated by the desire to collect eatables and food, that brave Rakshasa left his city.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)