श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 68: लवणासुर का आहार के लिये निकलना, शत्रुघ्न का मधुपुरी के द्वार पर डट जाना और लौटे हुए लवणासुर के साथ उनकी रोषभरी बातचीत  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.68.19 
स्वयमेवागत: शत्रुर्न मोक्तव्य: कृतात्मना।
यो हि विक्लवया बुद‍्ध्या प्रसरं शत्रवे दिशेत्।
स हतो मन्दबुद्धि: स्याद् यथा कापुरुषस्तथा॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘बुद्धिमान मनुष्य को अपने सामने आए हुए शत्रु को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। जो दुर्बल बुद्धि वाला मनुष्य अपने घबराए हुए मन के कारण शत्रु को भागने का अवसर देता है, वह कायर के समान मरता है।॥19॥
 
‘An intelligent person should never let go of an enemy who is in front of him. A person with a weak intellect who gives the enemy a chance to escape due to his nervous mind, dies like a coward.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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